जब मैं पीछे मुड़ता हूं तो सिर्फ अंधेरा दिखता है॰॰
मिला मिला कर मिट्टी को जबनया खिलौना बनता है
पाकर उसको हर बच्चे का
मन मयूर चहकता है
खेल खेल में वही खिलौना
जब हाथों से गिरता है
तब इस दुनिया में कुछ क्षण
सिर्फ अंधेरा दिखता है
जब मैं पीछे मुड़ता हूं तो सिर्फ अंधेरा दिखता है॰॰॰
जुटा-जुटा कर रुपयों का नर
ठेर खड़ा कर देता है
ठेरों ठेर जोड़ जोड़ कर
एक लंबी श्वास को लेता है
वही कमाई जब एक दिन यदि
चोरों के माथे पड़ती है
तब कभी तिजोरी खोलो तो
सिर्फ अंधेरा दिखता है
जब मैं पीछे मुड़ता हूं तो सिर्फ अंधेरा दिखता है॰॰॰
प्यार मोहब्बत की बातें सब
झूठी-मूटी लगती हैं
अपनी शादी होने पर गर
पत्नि छोड़ निकलती है
प्रथम प्यार जब बचपन का यदि
पचपन में दिख जाता है
तब अपना हृदय टटोलो तो
सिर्फ अंधेरा दिखता है
जब मैं पीछे मुड़ता हूं तो सिर्फ अंधेरा दिखता है॰॰॰
मंजिल के दिख जाने पर यदि
सफलता निकट झलकती है
साथ सफलता होने पर भी
सुख कलियां नहीं खिलती हैं
उन ताली के अंतर की ध्वनि
यदि कहीं हृदय को चुबती हैं
तब मंजिल ओर निहारो तो
सिर्फ अंधेरा दिखता है
जब मैं पीछे मुड़ता हूं तो सिर्फ अंधेरा दिखता है॰॰॰
लंबी उमर को पाकर के नर
मज़े खूब उड़ाता है
बिना लक्ष्य पहचाने गर,
मूल्य समय गवाॅता है
समय निकलने पर फिर
यदि धुंधला-धुंधला दिखता है
तब ओर घड़ी के देखो तो
सिर्फ अंधेरा दिखता है
जब मैं पीछे मुड़ता हूं तो सिर्फ अंधेरा दिखता है॰॰॰
जोड़ जोड़ कर पैसे सब
तू पुत्रों को अर्पण करता है
तेरे मरने के पीछे
तू बेटों के हाथों जलता है
तब श्मशान से घर को देखो
बस माटी माटी दिखती है
एक नए सूर्य में भी फिर क्यों
सिर्फ अंधेरा दिखता है ?
जब मैं पीछे मुड़ता हूं तो सिर्फ अंधेरा दिखता है॰॰॰
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